केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान पर वनकर्मियों में नाराजगी, बोले—‘नरपिशाच’ शब्द पर दें स्पष्टीकरण या मांगें माफी

सीहोर। कोसमी में वन विकास निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कथित बयान को लेकर वनकर्मियों में नाराजगी सामने आई है। बयान में इस्तेमाल किए गए ‘नरपिशाच’ शब्द पर स्पष्टीकरण देने या सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर माफी मांगने की मांग को लेकर मंगलवार को मध्यप्रदेश वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ के सैकड़ों कर्मचारी कलेक्ट्रेट पहुंचे।
संघ के जिला अध्यक्ष श्याम सुंदर सिंह राजपूत के नेतृत्व में वनकर्मियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सक्षम प्रशासनिक अधिकारी एवं तहसीलदार डॉ. अमित सिंह को सौंपा। ज्ञापन में वनकर्मियों के सम्मान, सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित करने की मांग की गई।
‘नरपिशाच’ शब्द पर स्पष्टीकरण की मांग
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शासन के वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए वनभूमि की सुरक्षा और अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए काम करते हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों को अपमानित किए जाने से उनके सम्मान और मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
संघ ने मांग की कि कोसमी घटनाक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल किए गए ‘नरपिशाच’ शब्द के संदर्भ में स्पष्टीकरण लिया जाए। साथ ही यह स्पष्ट किया जाए कि यह शब्द किन व्यक्तियों और किस संदर्भ में इस्तेमाल किया गया था।
संघ का कहना है कि यदि यह शब्द वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल किया गया है, तो वह इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराता है। संघ ने संबंधित बयान वापस लेने और सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर क्षमा मांगने की भी मांग की है।
अतिक्रमण हटाने के दौरान पर्याप्त सुरक्षा देने की मांग

ज्ञापन में कहा गया कि वनभूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को विरोध, दबाव तथा सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक सहयोग के अभाव में निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका रहती है।
संघ ने भविष्य में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जरूरत के अनुसार पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने और जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की मांग की। इससे कार्रवाई कानून के अनुरूप और सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो सकेगी।
राजनीतिक दबाव से मुक्त जांच की मांग
वनकर्मियों ने ज्ञापन में यह भी मांग की कि अवैध अतिक्रमण के मामलों में राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संघ ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण पाने के उद्देश्य से कुछ अतिक्रमणकारी जनप्रतिनिधियों को भ्रमित कर सकते हैं। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उठाई गई।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला उपाध्यक्ष अशोक सिंह चौहान, जिला सचिव दीपक बेदी, संजय सक्सेना सहित वन विभाग के बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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